Debugging क्या है

Debugging क्या है ? USB debugging का एंड्रॉयड में क्या उपयोग है ?

आज हम आपको बताएंगे कि Debugging क्या होती है और इसके कितने प्रकार होते हैं । इसमें हम USB debugging पर भी आपको विस्तार से बताएंगे । आज के digitalised युग में Online Applications का बहुत ही ज्यादा उपयोग हो रहा है । परन्तु , क्या आपको पता है कि इन्हें बनाने में किन किं phases से गुजरना होता है ? नहीं न ! आज हम आपको उसी process में से एक debugging के बारे में अच्छे से समझाएंगे । तो चलिए शुरू से शुरू करते हैं –

Debugging क्या है ?

जब किसी भी सॉफ्टवेयर को बनाया जाता है तो उनको ढेरों प्रकार के process से गुजरना होता है । इनमें testing update , troubleshooting और maintainance mode इत्यादि शामिल हैं । आमतौर पर यह देखा गया है कि इन software applications में कई तरह के bugs और errors होते हैं । इन Bugs और errors को फिक्स / सॉल्व करना ही debugging होता है ।

Bugs का अगर सिम्पल हिंदी मीनिंग निकालें तो इसका अर्थ होता है कीड़े । अर्थात वे चीजें जो किसी भी सॉफ्टवेयर के health के लिए अच्छी नहीं होती हैं ।

Debugging के तीन Stages होते हैं –

  • bugs और errors को खोजना
  • ‌उनको एनालाइज करना ‌
  • अंत में उनको fix या solve करना ( remove करना )

इन प्रोसेस को तब शुरू किया जाता है जब कोई भी एप्लिकेशन सही से फंक्शन नहीं करता है । ऐसे में Debugging के माध्यम से errors को remove करके एप्लिकेशन को दोबारा टेस्ट किया जाता है । यह तब तक होता है जब तक कि सॉफ्टवेयर पूरी तरह से functional नहीं हो जाता है ।

Debugging कितने प्रकार की होती है ?

सामान्य तौर पर 2 प्रकार की debugging होती है जिसकी मदद से किसी भी plugin / software के errors को रिमूव किया जाता है । तो चलिए जानते हैं इन 2 प्रकार के debugging के बारे में –

1. PHP Debugging

सबसे पहले नंबर पर आता है PHP Debugging । इसमें PHP कोड को debug करने के लिए PHP में debugger को अटैच किया जाता है । Kint को PHP Debugging टूल के तौर पर उपयोग में लाया जाता है ।

आप अपने WordPress में भी आसानी से Debugging को एनाबल कर सकते हैं । इसके लिए आपको Cpanel या FTP प्रोग्राम की मदद लेनी होगी । इसकी मदद से File Manager के WP-config.php फाइल को एडिट करना है । इसमें Debugging के आगे false code को हटा के ” True ” टाइप करना है । इस तरह से जितने भी errors आपके back end और front end में होंगे , वे error_log.txt फाइल में log हो जाएंगे ।

2. Javascript Debugging

Javascript Debugging में ब्राउज़र का Debugger Tool और Javascript Console का उपयोग होता है । किसी भी javascript error की वजह से वर्डप्रेस की साइट पूरी तरह से बंद हो जाएगी और फंक्शन करना बंद हो जाएगी । Javascript Console की मदद से इन errors को फिक्स और रिमूव किया जा सकता है ।

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इसकी जरूरत क्यों पड़ती है ?

अब हम बात करेंगे कि किसी भी developer या content creator को debugging की जरूरत क्यों पड़ती है या इसके क्या फायदे हैं –

1. इसकी मदद से data structure के बारे में जरूरी जानकारी का पता चलता है । इसके साथ ही data structures को आसानी से interpret भी किया जा सकता है ।

2. यह errors को तुरंत रिपोर्ट करता है जिसकी वजह से कम समय में ही errors को रिमूव और फिक्स करना आसान हो जाता है । इसकी मदद से Software Development आसान हो जाता है ।

3. इसकी मदद से developers को useless और distracting information को minimise करने में आसानी होती है ।

डिबगिंग के प्रोसेस में कौन कौन से steps शामिल हैं ?

तो चलिए अब विस्तार से बात करते हैं कि Debugging के कौन कौन से steps शामिल हैं –

1. Error का पता लगाना : Errors की वजह से पूरा developmental work बंद हो सकता है । इसकी वजह से समय और पैसे दोनों की भारी बर्बादी हो सकती है । इसलिए सबसे पहले errors का पता लगाया जाता है । कई बार ऐसा होता है कि application / software के यूजर्स द्वारा दिया गया bug report सही नहीं होता या उनके द्वारा बताए गए errors का पता नहीं लगाया जा सकता । ऐसे में Developers को सबसे पहले actual error को ढूंढना होता है ।

2. Error के लोकेशन का पता लगाना : Debugging करने के लिए अगला step है कि error के सही location का पता लगाया जाय । Actual error के पता लगने के बाद codes को चेक करना होता है कि किस spot पर एरर आ रहा है । इस प्रोसेस में error के सही जगह का पता लगाया जाता है ताकि आगे यूज एनालाइज किया जा सके ।

3. Error को एनालाइज करना
Debugging का अगला स्टेप है कि आपको Error को अच्छे से analyse करना होगा । इसमें actual में codes को एनालाइज किया जाता है ताकि error को आप अच्छे से समझ सकें । किसी भी error को एनालाइज करने में भी दो महत्वपूर्ण बातों का ख्याल रखा जाता है –

  • आपने जो error खोजा है , उसके अलावा भी आसपास कोई अन्य error तो नहीं है ।
  • ‌इसके बाद इन errors को फिक्स करते समय अन्य क्या damages हो सकते हैं ताकि इसे ज्यादा ध्यान से किया जा सके । Expert Developers ही इन errors को एनालाइज और remove कर सकते हैं ।

4. Error को फिक्स करना सबसे अंत में आता है । आपको सभी errors को remove और fix कर देना है । इसके बाद आपको scripts को चेक करना चाहिए ताकि पता चल सके कि pass हुआ या नहीं ।

डिबगिंग के लिए कौन कौन से tools मौजूद हैं ?

Debugging tools के प्रकार के कंप्यूटर सॉफ्टवेयर टूल्स होते हैं जिनकी मदद से अन्य प्रोग्राम्स को टेस्ट और debug करने के लिए किया जाता है । इंटरनेट पर ढेरों पब्लिक डोमेन सॉफ्टवेयर जैसे GDB और DBX मौजूद हैं जिनकी मदद से आसानी से debugging की जा सकती है । अगर automated debugging tools की बात करें तो वे हैं Code Based Tracers , profilers , interpreters इत्यादि ।

नीचे दिए गए लिस्ट के Debuggers को दुनिया भर में use किया जाता है और ये सबसे ज्यादा पॉपुलर हैं

Testing और Debugging में क्या अंतर है ?

Testing में यह पता लगाया जाता है कि किसी भी वेबसाइट या सॉफ्टवेयर में कौन कौन से errors हैं । इससे यह verify किया जाता है कि कोई भी एप्लिकेशन bug free है । तो वहीं Debugging उन bugs को remove करने या फिक्स करने का एक प्रोसेस हैं , जिन्हें testing के दौरान पाया गया था ।

Testing को tester द्वारा किया जाता है जबकि Debugging को हमेशा Programmer या developer द्वारा किया जाता है । इसी तरह टेस्टिंग software development life cycle (SDLC) का एक स्टेज है जबकि Debugging SLDC का एक स्टेज या पार्ट न होकर के testing की वजह से होने वाला एक process है । अब आप समझ गए होंगे कि इन दोनों में अंतर क्या है ।

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USB Debugging क्या है ? इसका android में क्या उपयोग है ?

USB Debugging एंड्रॉयड मोबाइल फोन में एक ऐसा फीचर होता है जिसकी मदद से नए बने apps / softwares को usb के द्वारा किसी अन्य device या कंप्यूटर में testing के लिए कॉपी किया जाता है । यह इसलिए किया जाता है ताकि इन apps को अच्छे से एनालाइज किया जा सके । इसके साथ ही इनमें से errors और bugs को खोज कर remove किया जा सके ।

Android Programmers के लिए यह बहुत ही जरूरी होता है । Android Apps को बनाने में इसका बहुत ही ज्यादा महत्व है । USB Debugging का उपयोग मोबाइल फोन को root करने के लिए भी किया जाता है । इसके साथ ही इसको enable करके आप अपने PC के apps को अपने मोबाइल में install भी कर सकते हैं । यह device को कमांड भेजने के लिए उपयोग में लाया जाता है ।

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