World Consumer Rights Day in Hindi – विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के बारे में

क्या आप World Consumer Rights Day in Hindi या विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के बारे में जानते हैं ? क्या आप एक उपभोक्ता के तौर पर , अपने अधिकारों के बारे में जानते हैं ? क्या आप जानते हैं कि यह दिवस क्यों और कब मनाया जाता है ? अगर नही तो इस पोस्ट को अंत तक पढ़ें और आप World Consumer Rights Day के बारे में सभी जरूरी बातें जान जायेंगे ।

इस टेक्नोलॉजी और इंटरनेट की दुनिया ने हमारी जिंदगी को काफी आसान कर दिया है । आज हम घर में बैठे बैठे ही इंटरनेट से कोई सामना खरीद सकते हैं और ऑनलाइन ही पैसे भी भुगतान कर सकते हैं । आज जब ज्यादा से ज्यादा लोग online shopping कर रहे हैं ऐसे में ढेरों E – commerce कंपनियां अब मार्केट में आती जा रही हैं ।

ऐसे में , उपभोक्ता यानि consumer को नुकसान न हो , इसलिए हम World Consumer Rights Day in Hindi के पोस्ट में , उपभोक्ता और उपभोक्ता अधिकार दिवस से जुड़ी सभी अहम जानकारियां देंगे । तो चलिए से शुरू से शुरुआत करते हैं –

World Consumer Rights Day क्या है ?

World Consumer rights day in Hindi
World Consumer Rights Day | Image Source : Freepik

World Consumer Rights Day यानि विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस को पूरी दुनिया में हर वर्ष 15 मार्च को मनाया जाता है । यह दिवस उन उपभोक्ताओं को उनके मूल अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है जिसे ज्यादातर बिजनेस अनदेखा करते हैं ।

इस दिन को मनाने के शुरुआत Consumers International ने की थी , जो एक non profit organisation है और उपभोक्ताओं के मूल अधिकारों के संरक्षण के लिए काम करती है ।

World Consumer Rights Day की शुरुआत और इतिहास

ऐसा माना जाता है कि इसकी शुरुआत और उपभोक्ताओं के मूल अधिकारों पर प्रकाश सबसे पहले अमेरिका से हुई । अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति John F. Kennedy ने यूएस कांग्रेस को संबोधित करते हुए कहा था कि –

उपभोक्ता की अगर परिभाषा पर गौर करें तो उसमें हम सभी आते हैं । उपभोक्ता सबसे बड़े आर्थिक समूह है जो किसी भी पब्लिक या प्राइवेट आर्थिक निर्णयों को प्रभावित भी करते हैं और प्रभावित भी होते हैं । फिर भी वे एक बहुत ही महत्वपूर्ण समूह है जिनके विचारों को कई बार अनदेखा कर दिया जाता है ।John F. Kennedy

इस तरह उन्होंने दुनिया भर के उपभोक्ताओं के द्वारा सामना किए जा रहे समस्याओं पर प्रकाश डाला । इस तरह , सबसे पहली बार 15 मार्च , 1983 को विश्व उपभोक्ता दिवस मनाया गया ।

विश्व उपभोक्ता दिवस क्यों मनाया जाता है ?

विश्व उपभोक्ता दिवस एक वार्षिक उत्सव है जिसे दुनियाभर के उपभोक्ताओं के मूल अधिकारों के महत्व को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है । इस दिन को मनाने के पीछे खास उद्देश्य उपभोक्ता के अधिकारों की रक्षा करना और खरीददारी से संबंधित हुए उपभोक्ता के साथ अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना है ।

आज के दिन ढेरों ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन होता है । भारत में मुख्य रूप से शिक्षण संस्थाओं , सरकारी और निजी संस्थाओं , गावों , जिला , प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर इस दिन को मनाया जाता है और उपभोक्ताओं को अपने मूल अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाता है । इस दिन , जिला स्तर पर संगोष्ठी का भी आयोजन किया जाता है ।

आज के दिन , भारत सहित अन्य देशों में ढेरों प्रकार के campaigns और activities की जाती हैं ताकि सरकार उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के लिए नए पॉलिसीज बनाए । हर वर्ष , उपभोक्ताओं द्वारा सामना किए जा रहे समस्या को एक theme के रूप में सरकार और विश्व के प्रति प्रस्तुत किया जाता है ताकि उसका समाधान हो सके ।

भारत में उपभोक्ता अधिकार

भारत में उपभोक्ता अधिकार कुछ इस प्रकार हैं –

  • सुरक्षा का अधिकार
  • सूचना का अधिकार
  • चुनने का अधिकार
  • सुने जाने का अधिकार
  • निवारण का अधिकार
  • उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार

चलिए एक एक करके सभी के बारे में बात करते हैं –

1. सुरक्षा का अधिकार

सबसे पहले उपभोक्ता को सूचना का अधिकार प्राप्त है जिसमें जीवन या संपत्ति के लिए हानिकारक सामान या सेवा के खिलाफ उपभोक्ता अपनी आवाज उठा सकता है । यह सिर्फ स्वास्थ्य , खाद्य प्रसंस्करण ( food processing ) और फार्मास्युटिकल यानि दवाओं पर मुख्य रूप से लागू होता है ।

हमारे देश भारत में प्रतिवर्ष हजारों लाखों लोगों की जानें स्वास्थ्य सेवाओं में की गई लापरवाही की वजह से होती है । इसके साथ ही मरीज को गलत दवाइयां देने पर मौत की खबरें भी ही हमेशा अखबारों में पढ़ते हैं ।

जरूरी बात !
Harvard University द्वारा 2017 में किए गए एक रिसर्च के मुताबिक , भारत में हर साल लगभग 50,00,000 लोगों की मौत चिकित्सा में की गई लापरवाही की वजह से हो जाती है । ज्यादातर डॉक्टरों को सही ढंग से स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना नही आता और न ही वे अनुभवी होते हैं ।

2. सूचना का अधिकार

उपभोक्ता को सूचना का भी अधिकार प्राप्त है । सूचना का अधिकार के तहत , एक उपभोक्ता को बेचे जा रहे किसी भी उत्पाद या सेवा का मूल्य , भार , गुणवत्ता , शुद्धता की जानकारी दी जानी चाहिए । खरीदे जा रहे किसी भी उत्पाद या सेवा के बारे में सभी जरूरी जानकारी को प्राप्त करना एक उपभोक्ता का अधिकार है ।

भारत में उपभोक्ता ये सभी जानकारियां मुख्य रूप से दो तरीके से पाते हैं , पहला उत्पाद के प्रचार में या दूसरों से सुनकर । हालांकि , ये दोनो तरीके पूरी तरह से विश्वसनीय तो नहीं हैं परंतु भारत में ज्यादातर लोग इन्हीं की मदद से किसी भी उत्पाद के बारे में जरूरी जानकारियां जानते हैं ।

भारत में सूचना के अधिकार को ध्यान में रखकर ही कुछ कानून बनाए गए हैं जिनके तहत कंपनी या सामना बेचने वाले को प्रोडक्ट की पैकेजिंग पर सभी जरूरी जानकारियां उपलब्ध करानी ही होती हैं । इसके साथ ही सेवाओं पर भी यह लागू होता है जिसके लिए Terms of use , disclaimer , consent जैसी चीजें बनाई जाती हैं ।

3. चुनने का अधिकार

आज जब मार्केट में हर प्रोडक्ट का एक विकल्प मौजूद है और सभी एक दूसरे से competition कर रहे हैं , ऐसे में एक उपभोक्ता को चुनने का अधिकार होना चाहिए । उपभोक्ता के पास विकल्प चुनने का अधिकार होना चाहिए । कोई भी विक्रेता किसी भी उत्पाद का केवल एक ही ब्रांड नहीं बेच सकता है ।

ऐसा इसलिए किया गया है ताकि मोनोपॉली ( एकाधिकार ) को रोका जा सके। मोनोपॉली हमेशा ग्राहक के हितों के खिलाफ होती है । इसमें उपभोक्ता के जरूरत की वस्तुओं को किसी भी प्रकार से उस तक उपलब्ध कराना भी इसी के अंतर्गत आता है ।

4. सुने जाने का अधिकार

Consumer Protection Act 1986 में कहा गया है कि

The right to be heard and to be assured that consumer’s interests will receive due consideration at appropriate forums .Consumer Protection Act 1986

इसका अर्थ है कि सुने जाने का अधिकार यह सुनिश्चित करता है कि उपभोक्ता के हितों को उचित मंचो पर सुना और इसका ध्यान रखा जाएगा । यह आपका , एक उपभोक्ता का यह अधिकार है कि उपभोक्ता संरक्षण कानून के अंतर्गत आने वाली सभी forums और संगठन आपकी आवाज को सुनें और आपके हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हों ।

सरकार द्वारा समय समय पर ढेरों प्रकार के कदम उठाए जाते हैं ताकि उपभोक्ता के सुने जाने के अधिकार की रक्षा की जा सके । एक रिपोर्ट के मुताबिक , साल 2019 में संसद से The Consumer Protection Bill , 2019 को सहमति मिली थी ।

5. निवारण का अधिकार

the Consumer Protection Act 1986 के मुताबिक , निवारण का अधिकार उन सभी trade practice कर रहे संस्थानों या व्यक्तियों के खिलाफ आवाज उठाना है जो उपभोक्ता के साथ बेईमानी और अन्याय करते हैं । भारत में तेजी से e commerce व्यापार बढ़ रहा है और ऑनलाइन भुगतान करने का चलन शुरू हो चुका है । ऐसे में , निवारण का अधिकार उन सभी उपभोक्ताओं को यह अधिकार देता है कि वे उन व्यापारियों या व्यापार के खिलाफ आवाज बुलंद कर सकें जो उनका शोषण कर रहे हैं ।

भारत सरकार ने भी इस अधिकार की रक्षा करने के लिए ढेरों ठोस कदम उठाए हैं । उपभोक्ता कोर्ट जैसे District Consumer Disputes Redressal Forums at district level , State Consumer Disputes Redressal Commissions और National Consumer Disputes Redressal Commissions को सेटअप किया गया है ताकि कंज्यूमर्स के साथ अन्याय न हो ।

6. उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार

हर भारतवासी का यह अधिकार है कि उसे उपभोक्ता संरक्षण से जुड़ी सभी चीजों को बताया पढ़ाया जाए ताकि लोग अपने हितों के प्रति जागरूक हो सकें । इस अधिकार से यह सुनिश्चित किया जाता है कि सभी के पास ऐसी चीजें या सेवाएं हों जिससे कि वे अपने मूल अधिकारों और उपभोक्ता संरक्षण कानून से जुड़ी चीजों को जान समझ सकें ।

Consumer Education को सामान्य और मुख्य तौर पर स्कूलों और कॉलेजों में दिया जाता है । साथ ही , उपभोक्ता जागरूकता अभियान की मदद से भी लोगों को सही ढंग से बिना शोषित हुए खरीददारी के लिए प्रोत्साहित किया जाता है । यह The Consumer Protection Act , 1986 का अंतिम उपभोक्ता अधिकार भी है ।

Tips for Consumers in Hindi

चलिए अब बात करते हैं उन tips की जिन्हें एक उपभोक्ता को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए और खरीददारी करनी चाहिए –

  • कभी भी दुकानदार या किसी अन्य के दबाव में आकर कोई भी समान न खरीदें । याद रखें कि आपके पास ‘ नहीं ‘ कहने का भी अधिकार है । जब भी आप खरीददारी करें तो सोच समझ कर ही करें खासकर कि जब आपके ज्यादा रुपए खर्च हो रहे हों ।

  • किसी भी प्रकार के खरीददारी में agreement या contract को सही ढंग से पढ़ लें । ज्यादातर मामलों में अनुबंध को न पढ़ना , मुसीबत का कारण बनता है ।

  • किसी भी बेचने वाले को अपनी निजी जानकारी तब तक न दें जबतक कि आपने सामान या सेवा खरीदने का अंतिम निर्णय न ले लिया हो । यह आपके लिए बिल्कुल भी अच्छा नही होगा कि आप अपनी संपूर्ण जानकारी सामने वाले को यूंही दे दें ।

  • अगर आप जिस भी वस्तु या सेवा को खरीदने जा रहे हैं उसमे आपके काफी रुपए खर्च होने वाले हों , तो सबसे पहले यह पता लगाएं कि वह बिजनेस वैध यानि legitimate है या नही । यह काम आप Better Business Bureau की मदद से भी कर सकते हैं ।

  • खरीददारी , उपभोक्ता संरक्षण कानून और इनसे संबंधित हर जानकारी से updated रहें । एक जिम्मेदार उपभोक्ता का यह कर्तव्य बनता है कि वह चीजों के प्रति जागरूक और सावधान रहे और दूसरो को भी करे ।

  • अगर आपको लग रहा है कि कोई ऑफर हद से ज्यादा ही बढ़िया है तो सावधान हो जाएं । आज के समय में ज्यादातर केसेज धोखाधड़ी के इन ऑफर्स के चक्कर में ही आ रहे हैं । आप खुद की बुद्धि का इस्तेमाल करके ही किसी भी प्रकार की खरीददारी करें और आकर्षक ऑफर्स के चक्कर में न पड़ें

  • हमेशा बजट बनाएं और उसी हिसाब से खरीददारी करें । एक स्मार्ट उपभोक्ता हमेशा बजट बनाता है और फिर उसके हिसाब से ही खरीददारी करता है । इससे आप बेफजूल का खर्चा करने से बच जाते हैं और विवेकपूर्ण खरीददार बनते हैं ।

  • कई बार जिन वस्तुओं या सेवाओं की हमे जरूरत नही होती , उन्हें भी हम ऑफर या सेल पर होने से खरीद लेते हैं । यकीन मानिए , यह आप फायदे का सौदा नहीं कर रहे हैं बल्कि अपने मेहनत से कमाए पैसे के प्रति लापरवाह बन रहे हैं ।

  • हमेशा receipts को दुकानदार से हर खरीददारी के बाद मांगे और उसे संभाल कर रखें । यह आपकी खरीददार का एक प्रमाण होता है जिसकी जरूरत तब पड़ेगी जब आपको सामान वापस करने , ठीक कराने या बेचने की जरूरत पड़ेगी ।

World Consumer Rights Day Slogans in Hindi

1. जागो ग्राहक जागो , अपने अधिकारो को पहचानो ।

2. सुरक्षित, शुद्ध और असरदायक , उपभोक्ता संरक्षण कानून है लाभदायक ।

3. वस्तु पर प्रिंट मूल्य ही देना है , नहीं तो उपभोक्ता न्यायालय ही सहारा लेना है ।

4. गारंटी वारंटी से हमेशा रहे खबरदार , उपभोक्ता अदालत ही दिखायेगी आपके अधिकार ।

5. गारंटी वारंटी से हमेशा रहे खबरदार , उपभोक्ता अदालत ही दिखायेगी आपके अधिकार ।

FAQs on World Consumer Rights Day in Hindi

चलिए अब बात करते हैं World Consumer Rights Day in Hindi पर कुछ जरूरी FAQs –

शिकायत किस शहर अथवा राज्‍य में दायर की जानी चाहिए ?

कोई भी शिकायत उस जिला मंच में दायर की जाएगी जिसके स्‍थानीय क्षेत्राधिकार में प्रतिपक्ष का निवास है अथवा वह कारोबार संचालित करता है या उसका कोई शाखा कार्यालय है या वह लाभ के लिए व्‍यक्तिगत रूप से कार्य करता है अथवा जहां कार्रवाई के कारण का पूर्णत: अथवा भागत: उद्भव हुआ है । उपभोक्‍ता अपने निवास स्‍थान के क्षेत्राधिकार में शिकायत दायर नहीं कर सकता ।

जिला मंच कहां पर अवस्थित हैं ?

“ जिला मंच ” की स्‍थापना राज्‍य सरकार द्वारा राज्‍य के प्रत्‍येक जिले में की गई है । आवश्‍यकता पड़ने पर राज्‍य सरकार किसी जिले में अतिरिक्‍त मंचों का गठन कर सकती है । जिला मंचों के संबंध में जानकारी , जिले के जिला समाहर्ता/जिला मजिस्‍ट्रेट से प्राप्‍त की जा सकती है । जिला मंचों के पतों और संपर्क विवरणों की जानकारी भी एन.सी.डी.आर.सी. की वेबसाइट http://ncdrc.nic.in से प्राप्‍त की जा सकती है।

शिकायत दायर करने की प्रक्रिया क्‍या है ?

कोई भी व्‍यक्तिगत रूप से शिकायतकर्ता द्वारा अथवा उसके एजेंट द्वारा दायर की जा सकती है । इसे न्‍यायालय शुल्‍क सहित पंजीकृत डाक द्वारा भेजा जा सकता है । सामान्‍यत: शिकायत की तीन प्रतियां भेजी जानी अपेक्षित होती है जिनमें से एक शासकीय प्रयोजनार्थ रख ली जाती है , एक प्रतिपक्ष को अग्रेषित की जाती है और एक शिकायतकर्ता को दी जाती है । यदि प्रतिपक्षों की संख्‍या अधिक है तो तदनुसार शिकायत की अधिक प्रतियों की आवश्‍यकता होगी ।

क्‍या मंच में अपने मामले को प्रस्‍तुत करने के लिए उपभोक्‍ता को किसी वकील की आवश्‍यकता होती है ?

उपभोक्‍ता मंच अर्द्ध-न्‍यायिक निकाय है जो सरल और त्‍वरित न्‍याय प्रदान करते हैं । इन्‍हें जटिल न्‍यायिक प्रक्रियाओं से मुक्‍त रखा गया है , इनका तरीका अत्‍यंत अनौपचारिक प्रकार का है और ये सिविल न्‍यायालय की जटिलताओं से मुक्‍त हैं । अत: , इनमें वकील अथवा किसी अन्‍य तर्क देने वाले की कोई आवश्‍यकता नहीं है और उपभोक्‍ता स्‍वयं ही अथवा अपने प्रतिनिधि के माध्‍यम से मामला दायर कर सकता है और अपनी शिकायत प्रस्‍तुत कर सकता है।

शिकायत में क्‍या विवरण दिया जाना चाहिए ?
  • शिकायतकर्ता का नाम , विवरण और पता
  • प्रतिपक्ष अथवा पक्षों का नाम , विवरण और पता
  • शिकायत से संबंधित तथ्‍य और यह कब और कहां उत्‍पन्‍न हुई
  • आरोपों , यदि कोई हों , के समर्थन में दस्‍तावेज
  • राहत – जो शिकायतकर्ता प्राप्‍त करना चाहता है ।

शिकायत दायर करने की समय-सीमा क्‍या है ?

शिकायत , कार्रवाई का कारण उत्‍पन्‍न होने की तारीख से दो वर्ष के भीतर दायर की जानी चाहिए । इसका अर्थ उस दिन जब सेवाओं में कमी अथवा वस्‍तुओं में दोष आया/पाया गया से दो वर्ष की अवधि होगा । इसे शिकायत दायर करने के लिए सीमांत अवधि के रूप में भी जाना जाता है ।

न्‍यायालय शुल्‍क का भुगतान कैसे किया जाता है ?

जिला मंच/राज्‍य आयोग/राष्‍ट्रीय आयोग के समक्ष दायर की जाने वाली प्रत्‍येक शिकायत के साथ , यथानिर्धारित शुल्‍क , किसी राष्‍ट्रीयकृत बैंक के रेखांकित डिमांड ड्राफ्ट अथवा रेखांकित भारतीय पोस्‍टल ऑर्डर के रूप में संलग्‍न होना चाहिए , जो राज्‍य आयोग के रजिस्‍ट्रार के पक्ष में उस स्‍थान पर देय होगा जहां राज्‍य आयोग अथवा राष्‍ट्रीय आयोग अवस्थि‍त है । इस प्रकार प्राप्‍त की गई राशि को संबंधित जिला मंच द्वारा जमा करा दिया जाएगा ।

यदि उपभोक्‍ता , उपभोक्‍ता मंच के आदेश से संतुष्‍ट न हो तो ?

यदि कोई उपभोक्‍ता किसी उपभोक्‍ता मंच के आदेश से व्‍यथित है तो वह उसके आदेश से 30 दिनों की अवधि के भीतर उच्‍चतर मंच में अपील कर सकता है । अपील मुख्‍यत: निम्‍नलिखित के अनुसार की जाएगी :

  • जिला मंच के आदेश के विरूद्ध राज्‍य आयोग को
  • राज्‍य आयोग के आदेश के विरूद्ध राष्‍ट्रीय आयोग को
  • राष्‍ट्रीय आयोग के आदेश के विरूद्ध उच्‍चतम न्‍यायालय को

World Consumer Rights Day in Hindi

इस पोस्ट के माध्यम से हमने World Consumer Rights Day in Hindi के बारे में सभी जरूरी जानकारी को समझाना चाहा है । अगर अब भी कोई प्वाइंट छूट गया है या आप पोस्ट के बारे में अपनी राय देना चाहते हैं तो अभी कॉमेंट करके बताएं । अगर आपको पोस्ट helpful लगा हो तो शेयर करें । साथ ही आप हमें Social Media पर नीचे दिए बटन से फॉलो भी कर सकते हैं ।

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