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    Home – Economics in Hindi – अर्थशास्त्र का अर्थ, परिभाषा, प्रकार और महत्व
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    Economics in Hindi – अर्थशास्त्र का अर्थ, परिभाषा, प्रकार और महत्व

    Tomy JacksonBy Tomy Jackson9 February 2024No Comments13 Mins Read
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    Economics in Hindi
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    Economics यानि अर्थशास्त्र हमारे जीवन का अभिन्न अंग है । हमारे जीवन से जुड़ी सभी आर्थिक गतिविधियां कहीं न कहीं अर्थशास्त्र से जुड़ी हुई हैं । आप अपने पास के दुकान से खाने की कोई वस्तु खरीदते हैं, सरकार आपसे टैक्स लेती है, आप अपने बैंक में रुपए बचाते हैं जिसपर आपको ब्याज प्राप्त होता है, यह सब कुछ अर्थशास्त्र से जुड़ा हुआ है ।

    Economics हमारे जीवन का अभिन्न अंग है और इसलिए इसका संपूर्ण अध्ययन भी जरूरी है । आपको इससे जुड़ी सामान्य जानकारियां अवश्य पता होनी चाहिए । इसलिए इस लेख में निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी जायेगी:

    • अर्थव्यवस्था क्या है ?
    • अर्थव्यवस्था की परिभाषा
    • अर्थव्यवस्था के प्रकार
    • महत्व और सिद्धांत
    • Frequently Asked Questions

    What is Economics in Hindi

    Economics जिसे हिन्दी में अर्थशास्त्र कहते हैं, सामाजिक विज्ञान है जो वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, वितरण और खपत का अध्ययन करता है । अर्थशास्त्र सीमित संसाधनों के साथ असीमित जरूरतों को पूरा करने के तरीके ढूंढता है ।

    हम सभी को पता है कि दुनिया में कुछ भी Unlimited यानि असीमित नहीं है । ज्यादातर प्राकृतिक संसाधन सीमित मात्रा में ही दुनिया में बचे हैं । अर्थशास्त्र यह अध्ययन करता है कि उन सीमित संसाधनों से किस प्रकार असीमित मांगों की पूर्ति की जा सकती है । अर्थशास्त्र की यह भी जिम्मेदारी है कि वह सीमित संसाधनों के सबसे बेहतर इस्तेमाल का रास्ता प्रशस्त करे ।

    अक्सर लोग सोचते हैं कि Economics की अगर बात की जा रही है तो यह अवश्य ही रुपए या मुद्रा से संबंधित होगा । जबकि ऐसा बिल्कुल भी आवश्यक नहीं है । हम रोजमर्रा के जीवन में कई फैसले लेते हैं और उनमें से कई फैसले मुद्रा या रुपयों से संबंधित न होते हुए भी अर्थशास्त्र से जुड़ा होता है ।

    Definition of Economics in Hindi

    बड़े बड़े अर्थशास्त्रियों ने अपने अपने हिसाब से Definition of Economics यानि अर्थशास्त्र की परिभाषा दी है । हालांकि इन सभी परिभाषाओं का निचोड़ यही है कि अर्थशास्त्र एक सामाजिक विज्ञान है जो वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन , वितरण और खपत का अध्ययन करने के साथ ही मनुष्यों द्वारा लिए गए फैसलों की विवेचना करता है ।

    1. प्रो. सैम्यूलसन के अनुसार के अनुसार अर्थशास्त्र की परिभाषा – “अर्थशास्त्र कला समूह में प्राचीनतम तथा विज्ञान समूह में नवीनतम वस्तुतः सभी सामाजिक विज्ञानों की रानी है ।”

    2. एडम स्मिथ के अनुसार अर्थशास्त्र की परिभाषा – “अर्थशास्त्र वह विज्ञान है जो धन का अध्ययन करता है ।”

    3. अल्फ्रेड मार्शल के अनुसार अर्थशास्त्र की परिभाषा – “राजनीतिक अर्थशास्त्र अथवा अर्थशास्त्र मानव जाति के साधारण व्यापार का अध्ययन है । यह व्यक्तिगत एवं सामाजिक क्रियाओं के उस भाग का परीक्षण करता है जिसका विशेष सम्बन्ध जीवन में कल्याण अथवा सुख से सम्बद्ध भौतिक पदार्थों की प्राप्ति एवं उपभोग से है ।”

    4. रॉबिन्स के अनुसार अर्थशास्त्र की परिभाषा – “अर्थशास्त्र वह विज्ञान है जो साध्यों तथा वैकल्पिक उपयोग वाले सीमित साधनों के सम्बन्ध के रूप में मानव व्यवहार का अध्ययन करता है ।”

    5. सैम्युएलसन के अनुसार – “अर्थशास्त्र इस बात का अध्ययन करता है कि व्यक्ति और समाज अनेक प्रयोगों में लगाये जा सकने वाले उत्पादन के सीमित साधनों का चुनाव एक समयावधि में विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन में लगने एवं उनको समाज में विभिन्न व्यक्तियों और समूहों में उपभोग हेतु, वर्तमान तथा भविष्य में बांटने के लिए किस प्रकार करते हैं, ऐसा वे चाहे मुद्रा का प्रयोग करके करें अथवा इसके बिना करें ।”

    इसी प्रकार कई विद्वानों ने अर्थशास्त्र को अपने अपने समझ के हिसाब से परिभाषित करने का प्रयास किया है । सबसे पहले Father of Economics कहे जाने वाले Adam Smith ने अर्थशास्त्र को धन का विज्ञान कहा था । लेकिन इस परिभाषा में समस्या यह थी कि यह निर्धनों की बात नहीं करता है । इसके बाद अन्य विद्वानों ने अर्थशास्त्र को कल्याण के विज्ञान के रूप में देखने की बात कही ।

    इसी तरह समय बीतने के साथ ही परिस्थितियों और अपनी अपनी समझ के अनुसार अर्थशास्त्रियों ने अर्थशास्त्र को परिभाषित करने का कार्य किया । बीसवीं शताब्दी आते आते अर्थशास्त्र को समृद्धि तथा विकास का विज्ञान कहा गया तो वहीं बीसवीं शताब्दी के अंत तक विद्वानों ने इसे धारणीय विकास का विज्ञान भी कहना प्रारंभ किया ।

    Branches of Economics in Hindi

    अर्थव्यवस्था को कुल दो भागों में बांटा गया है । पहला है व्यष्टि अर्थशास्त्र (Micro Economics) और दूसरा है समष्टि अर्थशास्त्र (Macro Economics) । चलिए इन दोनों शाखाओं के बारे में आसान भाषा में उदाहरण के साथ समझते हैं ।

    1. व्यष्टि अर्थशास्त्र (Microeconomics)

    सूक्ष्म अर्थशास्त्र अर्थशास्त्र की वह शाखा है जो इस बात से संबंधित है कि एक व्यक्ति द्वारा लिए गए निर्णय किस प्रकार पूरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं । यह दुर्लभ संसाधनों के आवंटन के संबंध में निर्णय लेने में व्यक्तियों और कंपनियों के व्यवहार का अध्ययन करता है ।

    उदाहरण के तौर पर, आप रोजमर्रा के जीवन में अनेकों वस्तुएं खरीदते हैं । आप अपनी आय का कुछ हिस्सा जरूरी वस्तुएं खरीदने में खर्च करते हैं, यह निर्णय व्यष्टि अर्थशास्त्र यानि Microeconomics का ही हिस्सा है । इसके अंतर्गत ही Demand (मांग) और Supply (आपूर्ति) आते हैं ।

    2. समष्टि अर्थशास्त्र (Macroeconomics)

    समष्टि (Macro) यानि बहुत बड़ा । Macroeconomics अर्थशास्त्र की एक शाखा है जो अध्ययन करती है कि कैसे एक समग्र अर्थव्यवस्था-बाजार बड़े पैमाने पर काम करते हैं । यह पूरी अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन, संरचना, व्यवहार और निर्णय लेने का अध्ययन करता है ।

    उदाहरण के तौर पर आप भारत सरकार को ले सकते हैं । भारत सरकार पूरे भारत के लिए निर्णय लेती है न कि किसी एक व्यक्ति के लिए । सरकार द्वारा बनाए गए कानून और आर्थिक नीतियां किस प्रकार काम करती हैं, यही समष्टि अर्थशास्त्र की विषय वस्तु है । समष्टि अर्थशास्त्र के अंतर्गत राष्ट्रीय आय, देश का कुल उपभोग व्यय, महंगाई, बेरोजगारी, जीडीपी आदि कई चीजें आती हैं ।

    Difference Between Microeconomics and Macroeconomics

    Economics के अंतर्गत मुख्य रूप से आप Microeconomics और Macroeconomics का अध्ययन करते हैं । इन दोनों के बीच कई बुनियादी अंतर हैं जिन्हें आपको समझ लेना चाहिए । आप नीचे दिए टेबल की मदद से दोनों के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझ सकते हैं ।

    Microeconomics Macroeconomics
    व्यष्टि अर्थशास्त्र अर्थशास्त्र की वह शाखा है जो निर्णय लेने और संसाधनों के आवंटन में व्यक्ति, घरेलू और संगठन के व्यवहार के अध्ययन से संबंधित है ।समष्टि अर्थशास्त्र अर्थशास्त्र की वह शाखा है जो पूरी अर्थव्यवस्था के व्यवहार और प्रदर्शन के अध्ययन से संबंधित है ।
    इसमें मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति, व्यक्तिगत आय और खर्च आदि आते हैं ।इसके अंतर्गत अध्ययन किए गए सबसे महत्वपूर्ण कारकों में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), बेरोजगारी, मुद्रास्फीति और विकास दर आदि शामिल हैं ।
    व्यष्टि अर्थशास्त्र बाजार के एक विशेष खंड का अध्ययन करता है ।समष्टि अर्थशास्त्र पूरी अर्थव्यवस्था का अध्ययन करता है, जिसमें कई बाजार खंड शामिल हैं ।
    व्यष्टि अर्थशास्त्र को व्यष्टि विश्लेषण या मूल्य सिद्धांत के नाम से जाना जाता है ।समष्टि अर्थशास्त्र को विश्लेषण को समष्टि विश्लेषण को आय व रोजगार सिद्धांत के नाम से जाना है ।
    सूक्ष्म अर्थशास्त्र कीमत विश्लेषण से संबंधित है ।व्यापक अर्थशास्त्र आय विश्लेषण से संबंधित है
    व्यष्टि अर्थशास्त्र वैयक्तिक समस्याओं का समाधान व नीति प्रस्तुत करती है। राष्ट्रीय अथवा अंतराष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्धारण मे इसका महत्व नही होता है ।समष्टि अर्थशास्त्र का राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्धारण मे महत्व होता है ।

    इस तरह आप समझ गए होंगे कि Macro Economics और Micro Economics के बीच क्या अंतर है । अर्थशास्त्र के अध्ययन के समय हम इन दोनों शाखाओं को पढ़ते हैं और दोनों के बीच अंतर को भी स्पष्ट करते हैं ।

    Important Terms Related to Economics

    Economics यानि अर्थशास्त्र से जुड़ी कई शब्दावलियां हैं जिनके बारे में आपको अवश्य जान लेना चाहिए । इन शब्दावलियों को बेहद ही आसान भाषा में उदाहरण के साथ नीचे समझाया गया है जिसे आप पढ़ सकते हैं ।

    1. Inflation (मुद्रास्फीति)

    Inflation का सरल और सीधा अर्थ है महंगाई । जब वस्तुओं और सेवाओं के मूल्यों में वृद्धि होती है तो इस परिस्थिति को हम महंगाई कहते हैं । जहां एक अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति होती है, वहां रहने की लागत बढ़ जाती है ।

    इसे आसान से उदाहरण से समझते हैं । वर्ष 2010 में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 48 रुपए हुआ करती थी । लेकिन आज वर्ष 2022 में जुलाई महीने में एक लीटर पेट्रोल की कीमत लगभग 100 रुपए है । इसी को हम मुद्रास्फीति यानि Inflation कहते हैं । दिन पर दिन वस्तुओं के दाम बढ़ते ही जा रहे हैं और रुपए की कीमत घटती ही जा रही है । इसका अध्ययन भी Economics में किया जाता है ।

    2. Deflation (अपस्फीति)

    अपस्फीति या Deflation वस्तुओं और सेवाओं के सामान्य मूल्य स्तर में कमी है । दूसरे शब्दों में अपस्फीति वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में एक सामान्य गिरावट है, जो आमतौर पर अर्थव्यवस्था में धन और ऋण की आपूर्ति में संकुचन से जुड़ी होती है ।

    Deflation का मुख्य कारण मांग से ज्यादा आपूर्ति का होना होता है । इसके अलावा अपस्फीति का अगला मुख्य कारण मुद्रा आपूर्ति में वृद्धि भी है । देश में मुद्रास्फीति और अपस्फिति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए RBI यानि Reserve Bank of India महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ।

    3. Marginal utility (सीमांत उपयोगिता)

    सीमांत उपयोगिता से तात्पर्य किसी वस्तु या सेवा के उपभोग से उपभोक्ता को मिलने वाली संतुष्टि की मात्रा से है । अर्थशास्त्रियों द्वारा सीमांत उपयोगिता का उपयोग यह पता लगाने के लिए किया जा सकता है कि उपभोक्ता को कितना सेवन करना चाहिए । यह Economics का महत्वपूर्ण शब्द है ।

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    मान लेते हैं कि आपको समोसे काफी पसंद हैं । आप सबसे पहले 2 समोसे खरीदते हैं लेकिन आपका मन नहीं भरता है । आपका 2 और समोसे खाने को जी ललचाता है और आप 2 समोसे और खरीद कर खा लेते हैं । अब आप पूरी तरह संतुष्ट है यानि बाद में लिए गए दो समोसे ही आपकी Marginal Utility है ।

    4. Oligopoly (अल्पाधिकार)

    एक अल्पाधिकार में, बाजार में कुछ ही फर्में या कंपनियां संचालित होती हैं । दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि अल्पाधिकार तब होता है जब कुछ कंपनियां किसी बाजार पर महत्वपूर्ण नियंत्रण रखती हैं । इस परिस्थिति में वस्तुओं या सेवाओं के मूल्य को निर्धारित करने का पूरा अधिकार उनके पास चला जाता है ।

    उदाहरण के तौर पर आप भारत के प्राइवेट एयरलाइंस को ले सकते हैं । SpiceJet और IndiGo जैसी एयरलाइंस भारत में Oligopoly का बेहतरीन उदाहरण हैं ।

    5. GDP (सकल घरेलू उत्पाद)

    सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) एक वर्ष में किसी देश में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य है । जीडीपी से तात्पर्य किसी देश के भौगोलिक क्षेत्र के भीतर उत्पादित वस्तुओं के मूल्य से है, चाहे वे नागरिकों द्वारा उत्पादित हों या विदेशियों द्वारा ।

    जीडीपी का उपयोग अक्सर अंतरराष्ट्रीय तुलना के साथ-साथ आर्थिक प्रगति के व्यापक माप के लिए एक मैट्रिक के रूप में किया जाता है। इसे अक्सर “राष्ट्रीय स्तर का विश्व का सबसे शक्तिशाली सांख्यिकीय संकेतक” माना जाता है ।

    6. Depreciation (मूल्यह्रास)

    किसी संपत्ति का मौद्रिक मूल्य समय के साथ उपयोग, टूट-फूट या अप्रचलन के कारण घटता जाता है । इस कमी को मूल्यह्रास के रूप में मापा जाता है । उदाहरण के तौर पर आप किसी फर्नीचर को ले सकते हैं । एक समय के बाद उसके मूल्य में अपने आप गिरावट आ जाती है ।

    इसके अलावा आप अन्य इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का भी उदाहरण देख सकते हैं । अगर आपने एक वर्ष पूर्व एक मोटरसाइकिल एक लाख में खरीदा है तो आज उसका दाम घटकर लगभग चालीस हजार या उससे भी कम हो गया होगा । Economics और Accounting में इसी को Depreciation या मूल्यह्रास कहा जाता है ।

    7. Indifference Curve (उदासीनता वक्र)

    जब आप Economics का अध्ययन करेंगे तो कई बार आपके सामने Indifference Curve शब्द आएगा । इसे हिंदी में उदासीनता वक्र भी कहा जाता है । यह दो वस्तुओं का एक संयोजन दिखाता है जो उपभोक्ता को समान संतुष्टि और उपयोगिता देता है जिससे उपभोक्ता उदासीन हो जाता है ।

    Economics Indifference Curve
    Source: byjus.com

    Significance of Economics in Hindi

    अगर बात करें Significance of Economics की तो सबसे पहले यह हमारे रोजमर्रा के जीवन का अभिन्न हिस्सा है । सब कुछ अर्थशास्त्र से जुड़ा है उदाहरण के तौर पर देश की अर्थव्यस्वस्था, आपकी आय और व्यय, ब्याज, गरीबी, बेरोजगारी, असमानता आदि । अर्थशास्त्र हमें अपने आसपास की दुनिया को समझने में सक्षम बनाता है और अर्थव्यवस्था कैसे संचालित होता है इसकी जानकारी देता है ।

    यह लोगों, सरकारों, निगमों और बाजारों को समझने में भी मदद करता है कि वे कोई भी आर्थिक निर्णय क्यों लेते हैं । अर्थशास्त्र के सबसे महत्वपूर्ण महत्वों में से एक यह है कि अर्थशास्त्रियों की जिम्मेदारी यह समझना है कि अर्थव्यवस्था में क्या हो रहा है और गरीबी, बेरोजगारी असमानता के पीछे का कारण क्या है ।

    अर्थशास्त्र, सामाजिक विज्ञान की तरह, आसानी से समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, नृविज्ञान और मनोविज्ञान के साथ घुल मिल जाता है । यह मनुष्य के व्यवहार को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । यह उत्पादक और उपभोक्ता, श्रम और प्रबंधन आदि के बीच संबंधों की व्याख्या करता है । जीवन के लगभग हर हिस्से में Economics की महत्ता है । उम्मीद है कि आपको अर्थशास्त्र का महत्व समझ आ गया होगा ।

    FAQs

    Q1. अर्थशास्त्र कितने प्रकार का होता है ?

    अर्थशास्त्र मुख्य रूप से चार प्रकार की होती है पारंपरिक आर्थिक प्रणाली, कमान आर्थिक प्रणाली, बाजार आर्थिक प्रणाली और मिश्रित प्रणाली ।

    Q2. अर्थशास्त्र की कितनी शाखाएं हैं ?

    अर्थशास्त्र की मुख्यतः दो शाखाएं हैं:
    1. व्यष्टि अर्थशास्त्र (Microeconomics)
    2. समष्टि अर्थशास्त्र (Macroeconomics)

    Q3. इकोनॉमिक्स में क्या पढ़ना होता है ?

    अर्थशास्त्र में आप आपूर्ति और मांग, पूर्ण और अपूर्ण प्रतिस्पर्धा, कराधान, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, मूल्य नियंत्रण, मौद्रिक नीति, विनिमय दरों, ब्याज दरों, बेरोजगारी और मुद्रास्फीति के बारे में पढ़ते हैं ।

    Q4. अर्थशास्त्र का जनक कौन है ?

    अर्थशास्त्र के जनक Adam Smith हैं जिन्होंने अर्थव्यवस्था को परिभाषित करते हुए इसे धन का विज्ञान बताया है ।

    Q5. भारत का सबसे बड़ा अर्थशास्त्री कौन है ?

    भारत का सबसे बड़ा अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन हैं जिन्हें आर्थिक विज्ञान में नोबेल मेमोरियल पुरस्कार और भारत रत्न मिला है ।

    Q6. भारत में अर्थशास्त्र के जनक कौन हैं ?

    भारत में कौटिल्य चाणक्य को अर्थशास्त्र का जनक कहा जाता है ।

    Q7. Economics का महत्व क्या है ?

    सब कुछ अर्थशास्त्र से जुड़ा है उदाहरण के तौर पर देश की अर्थव्यस्वस्था, आपकी आय और व्यय, ब्याज, गरीबी, बेरोजगारी, असमानता आदि । अर्थशास्त्र हमें अपने आसपास की दुनिया को समझने में सक्षम बनाता है और अर्थव्यवस्था कैसे संचालित होता है इसकी जानकारी देता है ।

    Conclusion on Economics in Hindi

    उम्मीद है कि आपको Economics in Hindi पर विस्तारपूर्वक दी गई जानकारी समझ आई होगी । अगर आप अर्थशास्त्र विषय में रुचि रखते हैं तो आपको इसका संपूर्ण अध्ययन अवश्य करना चाहिए । अर्थशास्त्र के अध्ययन के पश्चात आपके सामने कई नौकरियों की संभावनाएं खुल जाएंगी । आप एक शिक्षक के तौर पर भी Economics Subject पढ़ा सकते हैं ।

    अगर आपके मन में इस विषय से संबंधित कोई भी प्रश्न है तो नीचे कमेंट करके जरूर पूछें । इसके साथ ही अगर आपको आर्टिकल पसंद आया हो तो इसे शेयर जरूर करें ।

    Economics Definition Economics in Hindi Economics meaning in Hindi अर्थशास्त्र की परिभाषा अर्थशास्त्र की शाखाएं अर्थशास्त्र क्या है
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