What is Literary Sources in Hindi – साहित्यिक स्रोत

इतिहास के गर्त में काफी कुछ छुपा हुआ है । हम शायद भूतकाल की कई चीजें कभी भी नहीं जान पाएंगे । जितना कुछ भी हमें पता चल सका है वह ज्यादातर प्राचीन ग्रंथों की वजह से संभव हुआ है । कई प्राचीन ग्रंथ या लिखित दस्तावेज ऐसे मिले हैं जो प्राचीन सभ्यता की जानकारी देते हैं । इन्हें ही हम Literary Sources कहते हैं ।

वर्तमान समय में प्राचीन ग्रंथों, धरोहरों आदि पर विशेष ध्यान इसलिए दिया जा रहा है ताकि इतिहास की बाते हमें पता चल सके । इस आर्टिकल में हम इसी लिटरेरी सोर्स यानि साहित्यिक स्रोत के बारे में विस्तार से समझेंगे । उदाहरण के माध्यम से आप जानेंगे कि लिटरेरी सोर्सेज क्या होते हैं ।

What are Literary Sources ?

Literary Sources यानि साहित्यिक स्रोत लिखित रूपों में एकत्रित की गई जानकारी है जो प्राचीन संस्कृति और इतिहास के बारे में जानकारी देती है । प्राचीन समय में हमारे पूर्वज कैसे थे, उनकी बनावट और रहन सहन कैसा था आदि प्रश्नों का उत्तर हमें साहित्यिक स्रोतों की ही मदद से पता चलती हैं ।

उदाहरण के तौर पर, अगर आप मौर्य साम्राज्य की जानकारी चाहते हैं तो उस काल में लिखी अर्थशास्त्र, इंडिका, मुद्राराक्षस, जैन परिषद्परवणि आदि पढ़ सकते थे । जब इतिहासकार मौर्य साम्राज्य को समझने का प्रयास कर रहे थे तो उन्हें ये ग्रंथ मिले । इन ग्रंथों और अन्य स्रोतों की मदद से हमारे सामने पूरा मौर्य साम्राज्य का इतिहास मौजूद है ।

ऐसे में अर्थशास्त्र, इंडिका, मुद्राराक्षस, जैन परिषद्परवणि आदि Literary Sources यानि साहित्यिक स्रोत ही हैं । यहां तक कि महाभारत, रामायण, उपनिषद, मनुस्मृति आदि भी साहित्यिक स्रोत ही हैं जिनकी मदद से इतिहास और ऐतिहासिक व्यक्तियों के बारे में काफी कुछ पता चलता है ।

Types of Literary Sources in Hindi

Literary Sources को मुख्य रूप से कुल 3 भागों में बांटा गया है । चलिए संक्षेप में उदाहरण के साथ साहित्यिक स्रोत के प्रकार को समझते हैं ।

1. Religious Literature (धार्मिक साहित्य स्रोत)

भारत में कई धर्म हैं और उन धर्मों से जुड़ी कई प्राचीन किताबें हैं जिन्हें Religious Literary Sources की कैटेगरी में रखा जाता है । आपने अभी तक जितने भी धार्मिक ग्रंथों जैसे रामायण, महाभारत, गीता, वेद, धर्मशास्त्र, उपवेद, उपनिषद, त्रिपिटक आदि का नाम सुना है, वे सभी इसी श्रेणी में आते हैं ।

इनमें से सबसे प्रमुख और विश्वसनीय हैं वेद । वेदों की संख्या 4 है:

  • सामवेद
  • ऋग्वेद
  • अथर्ववेद
  • युजुर्वेद

इनमें भी ऋग्वेद का स्थान सबसे ऊंचा है और साहित्यिक स्रोत की दृष्टि से यह सबसे सहायक भी है । ऋग्वेद वैदिक संस्कृत भजनों का एक प्राचीन भारतीय संग्रह है । ऋग्वेद सबसे पुराना ज्ञात वैदिक संस्कृत ग्रंथ है । इस वेद की मदद से साहित्यकार यह पता लगाने में सफल रहे कि प्राचीन समय में लोगों की धार्मिक भावना या धार्मिक जीवन कैसा था ।

2. Foreign Account (विदेशी साहित्यिक स्रोत)

इब्न बतुता, मार्को पोलो, मेगास्थनीज, फायहान, ह्वेन सॉन्ग जैसे प्रसिद्ध प्राचीन यात्रियों के नाम आपने जरूर सुना होगा । ये यात्री अलग अलग देशों से भारत की यात्रा पर आए थे । कई बार यह यात्रा पूर्वनिर्धारित होती थी तो कई बार नहीं । जब इन यात्रियों ने भारत भ्रमण किया तो उन्होंने अपने अनुभव को बकायदे लिखा । उनके द्वारा लिखे उन्हीं ग्रंथों को Foreign Literary Sources कहते हैं ।

हालांकि ये साहित्यिक स्रोत विदेशियों द्वारा लिखे गए हैं लेकिन इनसे साहित्यकारों को काफी मदद हुई । इससे भारत के प्राचीन धार्मिक, साहित्यिक, सामाजिक परिवेश के बारे में पता चला । भारत के प्राचीन परिवेश को समझने में इससे काफी मदद मिली । कुछ विदेशी साहित्यिक स्रोत हैं:

  • इंडिका
  • ए रिकॉर्ड ऑफ बुडिस्टिक किंगडम
  • ज्योग्राफी ऑफ इंडिया
  • किताब उल हिंद

3. Secular Sources

आप Secular का अर्थ तो जानते ही होंगे, धर्मनिरपेक्षता । इसी तरह जब हम बात करते हैं Sscular Literary Sources या Secular Literature की तो इसका अर्थ ऐसे साहित्यिक स्रोत हैं जिनमें धर्म से जुड़ा कोई अंश नहीं मिलता है । ऐसे स्रोत वैज्ञानिक और तथ्यात्मक होते हैं और इनमें मान्यता, आडंबर, धार्मिक सामग्रियों का अभाव होता है ।

कहा जाता है कि धर्मनिरपेक्ष साहित्य में प्रशासकों और जनता के लिए कर्तव्यों, नियमों और विनियमों की संहिता शामिल है । ऐसे साहित्यिक स्रोत नियमों, कानूनों और सिद्धांतों की बात करते हैं । इसके कुछ उदाहरण आप नीचे पढ़ सकते हैं:

  • अर्थशास्त्र
  • पतंजलि
  • नीतिसार
  • उपनिषद
  • संगम साहित्य

Importance of Literary Sources

Importance of Literary Sources समझने से पहले जरूरी है कि आप सबसे पहले समझें कि हैं आखिर इतिहास पढ़ते ही क्यों हैं ? गणित, विज्ञान, संगणक जैसे विषय व्यावहारिक काम में आते हैं लेकिन इतिहास और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों की क्या महत्ता है । इसका साधारण सा उत्तर है कि इतिहास हमें भूत में की गई गलतियां समझाता है और उसे न दोहराने की सीख भी देता है ।

इसके साथ ही, इतिहास जीवन जीने की शैली से भी हमारा परिचय कराता है । इतिहास हमें हमारी जड़ों से जोड़कर रखता है । इतिहास ही एक मात्र ऐसा विषय है जिसकी मदद से हम अपने अस्तित्व और पूर्वजों को समझ पाते हैं । ऐसे में जरुरी हो जाता है कि ऐतिहासिक और साहित्यिक स्रोतों को संग्रहित किया जाए और उन्हें संरक्षित किया जाए ।

इससे हम अपने इतिहास और वर्तमान के लिए न सिर्फ सुरक्षित रख पाएंगे बल्कि अपनी गलतियों से सीख भी ले सकेंगे । भारत के परिदृश्य में देखा जाए तो भारत का इतिहास दुनिया का सबसे समृद्ध और विस्तृत इतिहास है । साहित्यिक स्रोत प्राचीन काल के दौरान भारत में जीवन के बारे में सबसे मूल्यवान जानकारी प्रदान करते हैं । वैदिक युग से शुरू होकर भारतीय उपमहाद्वीप के जीवन को मुख्यतः साहित्यिक स्रोतों की ही सहायता से जाना जाता है ।

उदाहरण के तौर पर अर्थशास्त्र और नीतिसार जैसे ग्रंथ प्राचीन भारत के आर्थिक और राजनैतिक जीवन पर प्रकाश डालने का काम करते हैं । तो वहीं उपनिषद और वेद भारत के धार्मिक इतिहास पर प्रकाश डालते हैं जिससे हमें अपनी जड़े पता चल पाती हैं । यानि Importance of Literary Sources की सूची काफी लंबी है ।

Conclusion

वेद, अर्थशास्त्र, इंडीका, उपनिषद आदि Literary Sources के ही उदाहरण हैं जिनकी मदद से हमें प्राचीन इतिहास की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है । साहित्यिक स्रोतों की मदद से हम जान पाते हैं कि हमारे पूर्वज किस प्रकार का जीवन जीते थे, उनकी आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक स्तिथि कैसी थी आदि ।

उम्मीद है कि आप विस्तार से Literary Sources क्या है, समझ गए होंगे । अगर आपके मन में इस आर्टिकल से सम्बन्धित कोई भी प्रश्न है तो आप नीचे कमेंट करके पूछ सकते हैं । इसके साथ ही अगर आपको दी गई जानकारी पसंद आई हो तो इसे शेयर जरूर करें ।

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