What is Auditing in Hindi – लेखांकन के प्रकार, उद्देश्य और फायदे

अगर आप कॉमर्स के छात्र हैं या आप बिजनेस से जुड़े शब्दावलियों में रुचि रखते हैं तो आपने कभी न कभी Auditing के बारे में जरूर सुना होगा । किसी भी कंपनी के लिए ऑडिटिंग कराना बहुत ही आवश्यक होता है । किसी कंपनी के long run में सफल होने के लिए भी ऑडिटिंग का एक महत्वपूर्ण भूमिका है । लेकिन What is Auditing in Hindi ?

यानि ऑडिटिंग है क्या ? ऑडिटिंग के प्रकार कौन कौन से हैं ? इसके फायदे क्या हैं और यह किसी भी कंपनी के लिए क्यों महत्वपूर्ण होता है ? इन सभी प्रश्नों का उत्तर मैं आपको इस आर्टिकल के दूंगा । इसलिए आर्टिकल अंत तक पढ़ें और इसे शेयर जरूर करें ।

What is auditing in Hindi

Auditing का हिंदी अर्थ है लेखा परीक्षा या लेखांकन जोकि एक महत्वपूर्ण शब्द है । इसका उपयोग लेखांकन में किया जाता है जो कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच और सत्यापन का वर्णन करता है । लेखा परीक्षा यह सुनिश्चित करने के लिए की जाती है कि वित्तीय विवरण प्रासंगिक लेखा मानकों के अनुसार तैयार किए गए हैं ।

चलिए अब इसे आसान भाषा में समझते हैं । हर कंपनी में अलग अलग विभाग होते हैं, जिनपर निगरानी रखना और उनके परफॉर्मेंस को समय समय पर मूल्यांकन करना बहुत आवश्यक होता है । कम्पनी रोज हजारों लाखों रुपए का लेन देन करती है जिसमें कोई गड़बड़ी न हो, इसका ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है ।

पहले के समय में जब व्यवसाय छोटे हुआ करते थे तब व्यवसायी अपना सारा लेखा जोखा न्यायाधीश को सुनाने जाते थे । पूरा लेखा जोखा सुनने के बाद न्यायाधीश यह निर्णय लेते थे कि सभी वित्तीय रिकॉर्ड सही हैं या नहीं । लेकिन आज के समय में काफी बड़ी बड़ी कंपनियां मार्केट में उतर चुकी हैं और अब ऑडिटिंग के लिए auditor को हायर करती हैं । एक ऑडिटर बिजनेस को यह भी जानने में मदद करता है कि उसे लाभ हुआ है या हानि ।

Who is Auditor in Hindi

एक ऑडिटर एक ऐसा व्यक्ति होता है जो वित्तीय रिकॉर्ड की सटीकता की समीक्षा और सत्यापन करने के लिए अधिकृत होता है और यह सुनिश्चित करता है कि कंपनियां कर कानूनों का पालन करती हैं । वह लेखांकन की प्रक्रिया को पूरी ईमानदारी के साथ निष्पक्ष होकर पूरा करता है ।

उनका प्राथमिक उद्देश्य व्यवसायों को धोखाधड़ी से बचाना, लेखांकन विधियों में किसी भी discrepancies को उजागर करना है । मैंने आपको ऊपर ही auditing की जानकारी दी है, इसलिए जो ऑडिटिंग करता है उसे ऑडिटर कहा जाता है ।

Types of auditing in Hindi

Types of auditing की बात करें तो यह मुख्य रूप से 2 प्रकार का होता है । एक है अंतरिक ऑडिटिंग और दूसरा बाहरी ऑडिटिंग । चलिए इन दोनों के बारे में संक्षेप में उदाहरण के साथ समझते हैं ।

1. Internal Auditing ( आंतरिक लेखांकन )

आंतरिक ऑडिट आपके व्यवसाय के भीतर होते हैं । ज्यादातर मामलों में आंतरिक लेखांकन संस्था अपने ही CA यानि Chartered Accountant से करवाती है । इससे कंपनी को पता चलता है कि उसे कितनी वार्षिक हानि या लाभ हुआ है । कई बार बाहरी स्वतंत्र एजेंसियों के ऑडिटर्स की मदद से भी अंतरिक ऑडिटिंग कराई जाती है ।

कई बिजनेस हर छह महीने में अंतरिक लेखांकन करवाते हैं लेकिन साल में एक बार auditing करवाना अनिवार्य होता है । इस प्रक्रिया में लगे सभी ऑडिटर या व्यक्तियों को निष्पक्षता से सभी जांच करके सही रिपोर्ट कंपनी को सौंपनी होती है । Internal auditing की मदद से कंपनी के मालिक या उच्च पदाधिकारी यह भी जान पाते हैं कि उनका बिजनेस बनें नियमों और कानूनों का सही ढंग से पालन कर रहा है या नहीं ।

2. External Auditing ( बाह्य लेखांकन )

External Auditing यानि बाह्य लेखांकन की प्रक्रिया में बाहरी एजेंसियों की मदद ली जाती है । अक्सर एक्सटर्नल ऑडिटिंग को आयकर विभाग द्वारा कराया जाता है जिसमें सरकारी नियमों और कानूनों, कंपनी के हितों और उद्देश्यों को ध्यान में रखा जाता है । बाह्य ऑडिटर पूरी तरह से निष्पक्ष होकर अपना काम करते हैं ।

आयकर विभाग द्वारा लेखांकन करने पर अगर किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तो संस्था पर सख्त कार्रवाई भी की जाती है । आयकर विभाग कम्पनी के आय की ऑडिटिंग करते हैं जिसमें सभी सरकारी नियमों और कानूनों को ध्यान में रखा जाता है ।

Objectives of Auditing in Hindi

बात करें अगर लेखा परीक्षा के उद्देश्यों की तो यह मुख्य रूप से 2 प्रकार का होता है । पहला है मुख्य उद्देश्य और दूसरा होता है सहायक उद्देश्य ।

1. मुख्य उद्देश्य

देखा जाए तो लेखांकन का मुख्य उद्देश्य वित्तीय स्थिति, लाभ और हानि विवरण की विश्वसनीयता का पता लगाना है । कंपनी द्वारा तैयार किए गए financial records को अलग अलग दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स की मदद से चेक करके सत्यापित करना ही ऑडिटिंग का मुख्य उद्देश्य है ।

कंपनी के सभी वित्तीय रिकॉर्ड सही हैं या नहीं, कम्पनी को सही मायनों में घाटा या मुनाफा हुआ है या नहीं, का पता लगाना auditor का मुख्य उद्देश्य होता है । इस कार्य में ऑडिटर को पूरी तरह निष्पक्षता बरतते हुए अपना काम करना होता है । ऑडिटर देखता है कि Profit & Loss Account और Balance Sheet सच्चे मायनों में कंपनी की वित्तीय स्थिति की जानकारी देते हैं या नहीं ।

2. सहायक उद्देश्य

Auditing का दूसरा सहायक उद्देश होता है सही समय पर धोखाधड़ी का पता लगाना और उसकी रोकथाम करना । इसके लिए लेखा परीक्षक कंपनी के सभी financial records की जांच, मिलान और अन्य दस्तावेजों से सत्यापन करते हैं । आमतौर पर ऑडिटर यह देखता है कि कहीं कंपनी ने बिना सबूत के लेनदेन रिकॉर्ड तो नहीं किया है, अगर हां तो फिर ऑडिट फेल हो जाता है और इससे कंपनी को भारी नुकसान झेलना पड़ता है ।

लेखांकन नीतियां का सही ढंग से पालन न करना, वित्तीय रिकॉर्ड में हेरफेर, मिथ्याकरण या परिवर्तन को रोकने हेतु ऑडिटिंग की मदद ली जाती है । कई बार कंपनी द्वारा financial records बनाते समय कुछ त्रुटियां भी हो जाती हैं, जिनकी सही से जांच करना भी auditing का सहायक उद्देश्य है ।

Importance of auditing in Hindi

आप अभी तक Auditing के महत्व को अच्छे से समझ चुके होंगे । चलिए मैं आपको संक्षेप में इसके सभी महत्वों को समझाता हूं:

  • यह कंपनी के उद्देश्यों की पूर्ति करने में उन्हें सक्षम बनाता है ।
  • पर्याप्त व्यावसायिक रिकॉर्ड बनाए रखने में मदद करता है ।
  • पर्यवेक्षण और निगरानी की सुविधा प्रदान करता है और अनियमित लेनदेन को रोकता है ।
  • संचालन के बारे में पर्याप्त जानकारी की कमी के कारण खराब प्रदर्शन करने वाले प्रबंधन के जोखिम को कम करता है
  • यह पहचानने में मदद करता है कि कौन से उत्पाद सबसे अधिक लाभदायक हैं और किन पर प्रबंधन का ध्यान देने की आवश्यकता होगी ।
  • कंपनी के रिकॉर्ड और रिपोर्ट में गलत बयानों को कम करने में मदद करता है ।
  • धोखाधड़ी को रोकने के लिए आंतरिक नियंत्रण प्रणाली के डिजाइन में मदद करता है ।
  • सभी लेन-देन को सत्यापित करता है और सुनिश्चित करता है कि सभी प्रक्रियाएं कानून के अनुसार पूर्ण हैं ।
  • यह नकद सत्यापन और अन्य संपत्तियों में भी सहायक है ।

ऑडिट कैसे किया जाता है ?

अक्सर यह प्रश्न पूछा जाता है कि ऑडिट कैसे किया जाता है यानि process of auditing in Hindi । ऑडिट करने के कुल 3 मुख्य चरण हैं ।

1. योजना

Auditing करने के लिए सबसे पहले जरूरी है कि सही योजना बनाई जाए जिसपर काम किया जा सके । ऑडिटिंग के लिए योजना बनाने के लिए सबसे पहले आपको एक टीम की जरूरत होगी । सभी audit team members और मैनेजमेंट से मिले inputs के आधार पर जोखिम का आंकलन किया जाता है ।

इसके बाद ऑडिटिंग के उद्देश्यों, इसके लिए जरूरी संसाधनों, समय आदि का ध्यान रखते हुए audit program विकसित किया जाता है । कम्पनी में ऑडिट करने से पहले कंपनी के पदाधिकारियों या मालिक से बातचीत भी की जाती है ।

2. फील्डवर्क और समीक्षा

पूरी योजना तैयार करने के बाद बारी आती है fieldwork की । फील्डवर्क करने के लिए कंपनी के staff members का इंटरव्यू लेना, विभिन testing और analysis करना, दस्तावेजों की सही से जांच करना और अपने क्लाइंट के साथ बातचीत करते रहना बहुत जरूरी होता है । एक ऑडिटर कम्पनी के सभी दस्तावेजों और फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स की जांच साक्ष्यों के आधार पर करता है ।

audit के objectives को पूरा करने के लिए सभी लेखापरीक्षा प्रक्रिया संपन्न करनी होती है । एक ऑडिटर अपनी पूरी रिपोर्ट तैयार कर लेता है ।

3. रिपोर्टिंग

अंत में आता है reporting जिसमें ऑडिटर कंपनी के ताकतों और कमजोरियों की एक रिपोर्ट तैयार करता है । इसके बाद वह क्लाइंट से मिलकर audit report की पूरी जानकारी उसे देता है । कमजोर पक्षों पर एक ऑडिटर क्लाइंट को जरूरी सुझाव भी देने का कार्य करता है और क्लाइंट कमजोर पक्षों को बेहतर बनाने के लिए क्या करेगा, इसकी भी रिपोर्ट तैयार करता है ।

इसके बाद अंत में final audit report तैयार की जाती है । ऑडिट कैसे किया जाता है के साथ साथ आप यह भी समझ गए होंगे कि Auditor work in Hindi क्या होता है ।

Top Audit Firms in India in Hindi

अगर आप अपने बिजनेस में ऑडिटिंग कराना चाहते हैं तो Top audit firms की मदद ले सकते हैं । आप इन ऑडिट फर्म्स की मदद से auditors हायर कर सकते हैं:

FAQs on Auditing in Hindi

मैंने Auditing in Hindi से जुड़े सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर आपको दे दिए हैं । इसके अलावा अन्य कई प्रश्न हैं जो इंटरनेट पर ऑडिटिंग को लेकर पूछे जाते हैं । नीचे FAQs सेक्शन में इन सभी प्रश्नों का उत्तर मैंने संक्षेप में दिया है ।

ऑडिटिंग का मतलब क्या होता है ?

ऑडिटिंग का हिंदी अर्थ लेखा परीक्षा या लेखांकन होता है जिसकी मदद से कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच और सत्यापन का वर्णन किया जाता है । यह सुनिश्चित करता है कि वित्तीय विवरण प्रासंगिक लेखा मानकों के अनुसार तैयार किए गए हैं ।

ऑडिटर कितने प्रकार के होते हैं ?

ऑडिटर मुख्य रूप से 2 प्रकार के होते हैं:
1. बाह्य अंकेक्षक
2. आंतरिक अंकेक्षक

ऑडिटिंग के कितने प्रकार होते हैं ?

ऑडिटिंग के दो प्रकार होते हैं:
1. आंतरिक लेखांकन
2. बाह्य लेखांकन

Government Audit क्या होता है ?

Government audit सरकारी धन के सार्वजनिक लेखांकन के लिए एक तंत्र या प्रक्रिया के रूप में कार्य करता है । भारी व्यय और बड़ी संख्या में लेन-देन की भागीदारी के कारण सरकारी लेखांकन हमेशा एक प्रकार की सतत लेखांकन होती है ।

Tax audit क्या होता है ?

Tax Audit एक करदाता द्वारा बनाए गए खातों की पुस्तकों के सत्यापन को संदर्भित करता है । कोई भी व्यवसाय जिसका कुल बिक्री कारोबार रु। 1 करोड़ को चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा अनिवार्य टैक्स ऑडिट पूरा करना होगा ।

Audit Report in Hindi क्या होता है ?

लेखापरीक्षक लिखित में अपनी राय व्यक्त करता है – जिसे “लेखा परीक्षा रिपोर्ट यानि audit report” कहा जाता है ।

Conclusion on Auditing in Hindi

Auditing meaning in Hindi के इस आर्टिकल में आपने विस्तार से ऑडिटिंग यानि लेखांकन के बारे में समझा । मैंने आपको लेखांकन से जुड़ी हर जरूरी जानकारी विस्तार से दी है और आपके सभी प्रश्नों का उत्तर देने की कोशिश की है । अगर आपके मन में विषय संबंधित अन्य प्रश्न हैं जिनका जवाब नहीं दिया गया है तो कॉमेंट करके जरूर पूछें ।

आपको यह आर्टिकल कैसा लगा, कॉमेंट करके बताएं । आर्टिकल helpful लगा हो तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर जरूर करें ।

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