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    Home – What Is BPO And How Does It Work In Hindi – बीपीओ क्या है
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    What Is BPO And How Does It Work In Hindi – बीपीओ क्या है

    Tomy JacksonBy Tomy Jackson9 February 2024Updated:9 February 2024No Comments11 Mins Read
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    What is BPO and how does it work in Hindi
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    आपने कभी न कभी BPO के बारे में अवश्य सुना होगा । आज के समय में यह इंडस्ट्री तेजी से grow कर रही है । अगर भारत की बात करे तो यहां सबसे ज्यादा नौकरिया बीपीओ ही प्रोवाइड कराती हैं । किसी भी बड़े बिजनेस को ऊंचाइयों तक पहुंचाने में भी इनका बहुत बड़ा योगदान है । इसलिए मैं इस टॉपिक के बारे में आज विस्तार से आपको बताऊंगा ।

    What is BPO And How Does It Work in Hindi के इस आर्टिकल में इस सेक्टर से जुड़ी सारी जानकारी दी जायेगी । इसमें मैं निम्नलिखित विषयों पर आपको जानकारी दूंगा:

    • बीपीओ क्या है
    • बीपीओ के कितने प्रकार होते हैं
    • Telecaller BPO क्या होता है
    • बीपीओ के लाभ
    • बीपीओ की कमियां
    • BPO Job/Career
    • Outsourcing और call centre से जुड़ी अहम जानकारियां

    इन सभी Topics पर सरल भाषा में उदाहरण सहित मैं बात करूंगा । इसलिए आपको यह आर्टिकल अंत तक पढ़ना चाहिए ।

    What is BPO in Hindi

    BPO का फुल फॉर्म Business Process Outsourcing होता है । देश दुनिया की बड़ी कंपनियां जब अपने बिजनेस के कुछ operations को किसी अन्य कंपनी को करने के लिए कॉन्टैक्ट देती हैं ताकि कम लागत और कम समय में कोई कार्य पूरा हो जाए तो उसे बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग कहा जाता है ।

    उदाहरण के तौर पर, मान लीजिए कि कोई Food Company है जो food processing, packaging जैसे मुख्य tasks को खुद ही करती है । लेकिन, उसे अब Customer Support Service की भी जरूरत आन पड़ी है । ऐसी परिस्थिति में उसके पास 2 विकल्प हैं:

    1. कम्पनी ऐसे लोगों को full time job दे जो कम्पनी के customer support service को संभालेंगे ।

    2. वह अपना समय और ज्यादा रुपए न खर्च करके कुछ लोगों को outsource कर सकती है जो contractual basis पर कम रूपयो में ही उसका काम कर देंगे ।

    जाहिर सी बात है कि कंपनी अपना काम कम लागत और कम समय में ही अपना काम करवाएगी । इस तरह आप समझ गए होंगे कि किसी विशिष्ट कार्य के लिए निश्चित समय के लिए किसी अन्य कंपनी या पार्टी को कार्य सौपना ही बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग है ।

    Types of BPO in Hindi

    अगर बात करें Business Process Outsourcing की तो इसके भी अलग अलग प्रकार हैं जिनके बारे में आपको समझ लेना चाहिए ।

    1. Back Office Outsourcing

    सबसे पहले स्थान पर Back Office Outsourcing आता है । इसके अंतर्गत administrative tasks के लिए किसी 3rd party को outsource किया जाता है । बैक ऑफिस आउटसोर्सिंग में आउटसोर्स किए गए लोग सीधे तौर पर ग्राहकों से नहीं जुड़ते हैं । लेकिन Front Officer Outsourcing के लोग इनपर पुरीबतर डिपेंड होते हैं ताकि पूरा बिजनेस ऑपरेशन सुचारू रूप से चल सके ।

    अगर हम बात करें Back Office Outsourcing की तो इसमें निम्नलिखित कार्यों के लिए आउटसोर्सिंग की जाती है:

    • Accounting
    • Data Management Service
    • Content Management
    • Software Development
    • Web Development

    अगर आप इन सभी कार्यों पर गौर करें तो आप पाएंगे कि इनमें professionals सीधे तौर पर Customers से नहीं जुड़ते हैं । लेकिन, ऐसे कार्यों के लिए भी BPO Parties की मदद ली जाती है ।

    2. Front Office Outsourcing

    दूसरे स्थान पर Front Office Outsourcing आता है जिसके अंतर्गत ऐसे operations आते हैं जिसमें customer के साथ सीधे तौर पर जुड़ना पड़ता है । उदाहरण के तौर पर आप CRM को ले सकते हैं जो lead generation का कार्य करते हैं, यानि वे सीधे तौर पर ग्राहकों से जुड़ते हैं ताकि कंपनी की बिक्री बढ़े । इस प्रकार की आउटसोर्सिंग को Front Office Outsourcing कहा जाता है ।

    बात करें अगर BPO के अंतर्गत आने वाले Front Office Outsourcing के अंतर्गत आने वाले operation की तो, इसमें:

    • Customer Care
    • Sales & Marketing
    • IT Support
    • Contact Center Services

    जैसे कार्य आते हैं । इन business operations में ग्राहक सीधे तौर पर लोगों से जुड़ते हैं ।

    Onshore, Offshore और Nearshore Outsourcing में अंतर

    अगर बात करें outsourcing की तो यह geographical boundries के अंदर और बाहर भी होता है । चलिए इसके बारे में भी संक्षेप में समझ लेते हैं:

    1. Onshore Outsourcing

    BPO के अंतर्गत Onshore Outsourcing भी आता है जिसे आप डोमेस्टिक आउटसोर्सिंग भी कह सकते हैं । Domestic Outsourcing यानि जब BPOs को हायर किया जाता है जो एक ही देश के हों । उदाहरण के तौर पर, मान लीजिए कि Mahindra भारतीय कंपनी है और customer support के लिए भारत की ही किसी 3rd party company को कॉन्टैक्ट देती है ।

    इस तरह यह Onshore या Domestic Outsourcing कहते हैं । यानि कि मुख्य कंपनी अपने ही देश के किसी अन्य कंपनी को कोई specific operation को करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट देती है जिसे घरेलू आउटसोर्सिंग कहा जाता है ।

    2. Offshore Outsourcing

    BPO के अंतर्गत दूसरे स्थान पर Offshore Outsourcing आता है । यह डोमेस्टिक आउटसोर्सिंग से पूरी तरह अलग है जिसमें कोई एक देश की कंपनी किसी अन्य देश की 3rd party को आउटसोर्स करके अपना काम करवाती है । ज्यादातर Customer Support, Content Management जैसे ऑपरेशन के लिए ही offshore outsourcing की जाती है ।

    उदाहरण के तौर पर Reddit, Samsung, Oracle जैसी कंपनियां जो अलग अलग देशों की हैं, Ukraine की BPOs को आउटसोर्स करती हैं ।

    3. Nearshore Outsourcing

    तीसरे स्थान पर Nearshore Outsourcing आता है जो BPO के अंतर्गत ही आता है । यह ऑफशोर आउटसोर्सिंग जैसा ही है लेकिन अंतर बस इतना है कि जो पड़ोसी देश होते हैं, उनकी BPO Companies को आउटसोर्स किया जाता है । जबकि ऑफशोर आउटसोर्सिंग में किसी अन्य देश जो पड़ोसी न हों, उन्हें outsource करने का कार्य किया जाता है ।

    उदाहरण के तौर पर, अगर भारत की कंपनी श्रीलंका की किसी BPO कंपनी को आउटसोर्स करती है तो उसे हम Nearshore Outsourcing कहते हैं ।

    Advantages of BPO in Hindi

    अबतक दी गई जानकारी को पढ़कर आप समझ चुके होंगे कि Advantages of BPO क्या है । लेकिन चलिए मैं आपको विस्तार से समझा देता हूं कि बीपीओ के क्या फायदे हैं ।

    • कम लागत लगती है ।
    • कम समय में ज्यादा काम होता है ।
    • Upgraded Technology की वजह से काम बेहतर ढंग से होता है ।
    • बिजनेस अपना main focus ज्यादा जरूरी टास्क पर दे पाते हैं ।
    • Quality से संबंधित समस्याएं नहीं होती हैं ।
    • कंपनी या बिजनेस को ग्रोथ दोगुनी तेजी से होती है ।
    • मार्केट में आ रहे dynamic changes के हिसाब से कंपनी ढल सकती है ।
    • Skilled labour और professionals मिलते हैं जिससे बिजनेस tension free होकर अन्य जरूरी ऑपरेशन पर फोकस कर सकती है ।

    Disadvantages of BPO in Hindi

    हर सिक्के के दो पहलू हैं यानि अगर advantages हैं तो कुछ disadvantages भी हैं । चलिए जानते हैं कि वे नुकसान कौन कौन से हैं:

    • सबसे बड़ी समस्या language या communication की आती है ।
    • अलग अलग time zone में ऑपरेट करने से meetings, conference, इत्यादि में समस्या आती है ।
    • बिजनेस का BPO पर पूरी तरह से कंट्रोल नहीं होता है ।
    • कई बार security issues भी सामने आते हैं क्योंकि बिजनेस अपने कई vital tasks कराने के लिए आउटसोर्स करती है और उनके साथ जरूरी जानकारियां सांझा करती है ।
    • बिजनेस कई बार BPO Companies पर ज्यादा ही निर्भर हो जाते हैं जो long run में बुरा होता है ।
    • कई बार BPO कंपनियां कम्पनी के ethics और values का सम्मान नहीं करती हैं जिससे बिजनेस पर बुरा असर होता है ।

    Telecaller BPO क्या होता है ?

    Telecallers वे व्यक्ति होते हैं जो किसी बिजनेस के संभावित ग्राहकों से संपर्क बनाते हैं ताकि बिजनेस की sales में वृद्धि हो । इसके अलावा, वे ग्राहकों की सामान्य समस्याओं को सुनते, समझते और हल भी करते हैं । Telecaller BPO यानि ऐसी 3rd party companies जिन्हें customer care support या Telecalling के लिए ही outsource किया गया हो ।

    कई ऐसी विदेशी कंपनियां हैं जिन्हें भारत में अपने सेवाएं सुचारू रूप से चलाने और मार्केट के विस्तार आदि के लिए भारत के BPO Companies से संपर्क करती हैं । इसके बाद भारत की कंपनियां Customer support Services को किसी विदेशी कंपनी के लिए हैंडल करती हैं । इस तरह आप समझ गए होंगे कि टेलीकॉलर बीपीओ क्या होता है ।

    Inbound और Outbound Call Centre क्या होते हैं ?

    Inbound call centre ऐसे कॉल सेंटर होते हैं जहां कॉल आती है लेकिन outbound call centre ऐसे कॉल सेंटर हैं जहां से संभावित ग्राहकों को कॉल किया जाता है ताकि उत्पाद की बिक्री बढ़ाई जा सके । उदाहरण के तौर पर अगर आप Jio Company के कस्टमर सपोर्ट को कॉल करते हैं, जो inbound call ही करते हैं । वे खुद से कस्टमर को सामान्य तौर पर कॉल नहीं करते ।

    लेकिन, Insurance Companies आपको खुद कॉल करती हैं भले ही आपने उन्हें कभी अपना contact details दिया हो या नहीं, जिसे cold calls भी कहते हैं । ऐसी कंपनियों के कॉल सेंटर्स को outbound call centre कहा जाता है । ये कम्पनी के sales को बढ़ाने के लिए संभावित ग्राहकों को कॉल करते हैं ।

    Top BPO Companies in India

    भारत में कुछ बड़ी BPO Companies हैं जो किसी अन्य कंपनी के operations को हैंडल करने का काम करती हैं । उनके नाम मैं आपको नीचे दे रहा हूं, जिनके बारे में अधिक जानकारी आप इंटरनेट पर सर्च करके ले सकते हैं ।

    • Accenture
    • Tata Consultancy Service ( TCS )
    • WIPRO
    • IBM
    • Infosys BPM

    BPO Job/Career

    अगर आप BPO के क्षेत्र में अपना career बनाना चाहते हैं तो आप नीचे दिए simple steps को फॉलो करें और कुछ बातों को ध्यान में रखें:

    1. आपने कम से कम 12th तक की पढ़ाई की हो

    अगर आप किसी बीपीओ कंपनी में नौकरी करना चाहते हैं तो यह जरूरी है कि आपने कम से कम 12th तक की पढ़ाई पूरी कर ली हो । बीपीओ में दो तरह की नौकरियां educational qualification के आधार पर दी जाती हैं:

    • 12th pass
    • Graduated

    अगर आपने अभी सिर्फ 12th ही पास किया है और किसी बीपीओ कंपनी में जॉब करना चाहते हैं तो आपको salary कम होगी । दूसरी तरफ, अगर आप Graduation पूरी कर चुके हैं तो आपको सैलरी थोड़ी ज्यादा होती है ।

    2. अपनी भाषा पर पकड़ मजबूत करें

    अगर आप बीपीओ कंपनी में काम करना चाहते हैं तो आपकी भाषा पर अच्छी पकड़ होनी चाहिए । ज्यादातर Business Process Outsourcing companies में अंग्रेजी भाषा की अच्छी जानकारी रखने वालों की मांग होती है । हिंदी भाषा भी अगर आपकी अच्छी है तो आपको नौकरी मिल सकती है लेकिन संभावनाएं कम हैं ।

    ऐसे में मैं आपको recommend करूंगा कि आप Communication skill को बेहतर करें और अंग्रेजी भाषा सीखें और सही ढंग से बोलना सीखें ।

    3. Job platforms पर प्रोफाइल अपडेट करें

    Naukri.com, LinkedIn, Shine जैसे अन्य job platforms पर आपको अपनी प्रोफाइल बना लेनी चाहिए या अगर पहले से प्रोफाइल बनी है तो उसे अपडेट कर सकते हैं । इससे कंपनियां खुद आपको कॉन्टैक्ट करके बीपीओ की जॉब देंगी । इन प्लेटफॉर्म पर आप अपने लिए बीपीओ की जॉब ढूंढ सकते हैं ।

    आप खुद से भी किसी कंपनी में BPO Job के लिए apply कर सकते हैं । हालांकि, आपके पास एक Resume होना अनिवार्य है । अगर आप नहीं जानते कि इसे कैसे बनाएं तो Resume कैसे बनाएं आर्टिकल पढ़ सकते हैं ।

    4. जरूरी जानकारी इकट्ठी कर लें

    बीपीओ में नौकरी मिलने से पहले आपका interview लिया जा सकता है इसलिए बीपीओ और customer support service से जुड़ी बेसिक नॉलेज आपके पास होनी चाहिए । कुछ प्रश्न जो इंटरव्यू में पूछे जा सकते हैं:

    • बीपीओ क्या है और कैसे काम करता है ?
    • आप बीपीओ की नौकरी क्यों करना चाहते हैं ?
    • Offshore और Onshore outsourcing में क्या अंतर है ?
    • क्या आप night shifts करने के लिए कंफर्टेबल हैं ?
    • in bound और out bound call centres में क्या अंतर है ?

    ऐसे ही प्रश्न पूछे जा सकते हैं, और लगभग सभी प्रश्नों का उत्तर भी मैंने आपको सरल और आसान भाषा में दे दिया है । इन प्रश्नों का सही जवाब देकर आप नौकरी पा सकते हैं ।

    Conclusion

    मुझे पूरी उम्मीद है कि आप समझ गए होंगे कि BPO Full Form क्या होता है, इसका क्या काम है, इसके प्रकार कितने हैं , इसके फायदे क्या हैं और अन्य जरूरी जानकारियां । अगर कोई प्रश्न आपके मन में है जिसका उत्तर आर्टिकल में नही दिया गया हो तो कॉमेंट करके जरूर पूछें । आपके हर प्रश्न का जवाब अवश्य दिया जायेगा ।

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    अगर आपको आर्टिकल में दी गई जानकारी पसंद आई तो आर्टिकल को अपने WhatsApp ग्रुप और दोस्तों से शेयर जरूर करें ।

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